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यह करेंट अफेयर्स विशेष रूप से UPSC, SSC, बैंक, रेलवे (RRB), UPSSSC, राज्य स्तरीय परीक्षाओं, CTET, Super TET, पुलिस, बीमा तथा अन्य सभी सरकारी भर्ती परीक्षाओं की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों के लिए तैयार किए गए हैं। नियमित अध्ययन और पुनरावृत्ति से आपकी जनरल अवेयरनेस और करंट अफेयर्स की तैयारी मजबूत होती है।
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आज का करेंट अफेयर्स (Daily Current Affairs)
1. भारत का पहला इंजीनियरिंग बायोलॉजी (Engineering Biology) स्नातक पाठ्यक्रम प्रारंभ
केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह (Dr. Jitendra Singh) ने भारत के पहले इंजीनियरिंग बायोलॉजी (Engineering Biology) स्नातक पाठ्यक्रम की घोषणा की तथा 2035 तक भारत को वैश्विक जैव-अर्थव्यवस्था (Bioeconomy) का अग्रणी राष्ट्र बनाने हेतु रोडमैप (Roadmap) लॉन्च किया।
परीक्षा हेतु प्रमुख तथ्य:
- भारत का पहला इंजीनियरिंग बायोलॉजी (Engineering Biology) स्नातक पाठ्यक्रम इंजीनियरिंग (Engineering), जीवविज्ञान (Biology), चिकित्सा (Medicine) एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence–AI) के समन्वय के माध्यम से भविष्य के लिए सक्षम जैव-प्रौद्योगिकी (Biotechnology) कार्यबल तैयार करेगा। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (Indian Institutes of Technology–IITs) ने अंतर्विषयक (Interdisciplinary) कार्यक्रमों के प्रस्ताव प्रस्तुत करना प्रारंभ कर दिया है।
- “बिल्डिंग इंडिया ऐज़ ए लीडिंग बायोइकोनॉमी पावरहाउस बाय 2035” (Building India as a Leading Bioeconomy Powerhouse by 2035) रोडमैप का उद्देश्य एआई-संचालित जीवविज्ञान (AI-driven Biology), सिंथेटिक बायोलॉजी (Synthetic Biology) तथा जैव-विनिर्माण (Bio-manufacturing) के माध्यम से भारत के जैव-प्रौद्योगिकी पारिस्थितिकी तंत्र (Biotechnology Ecosystem) को सुदृढ़ करना है।
- भारत की जैव-अर्थव्यवस्था (Bioeconomy) 2014 में USD 10 बिलियन से बढ़कर 2026 में USD 95 बिलियन हो गई है तथा 2030 तक इसके USD 300 बिलियन तक पहुँचने का अनुमान है। वर्तमान में देश में 11,000 से अधिक जैव-प्रौद्योगिकी स्टार्ट-अप (Biotechnology Start-ups) कार्यरत हैं।
- यह रोडमैप 2035 तक भारत की जैव-अर्थव्यवस्था (Bioeconomy) को USD 700 बिलियन तक विस्तारित करने का लक्ष्य निर्धारित करता है, जिसके लिए प्रस्तावित ₹50,000 करोड़ जैव-अर्थव्यवस्था विकास कोष (Bioeconomy Growth Fund), नवाचार (Innovation), प्रतिभा विकास (Talent Development) तथा उद्योग–शैक्षणिक साझेदारी (Industry Partnerships) को बढ़ावा दिया जाएगा।
2. सीएसआईआर-निस्पर (CSIR-NIScPR) एवं सीजीपीडीटीएम (CGPDTM) के बीच राष्ट्रीय ज्ञान संसाधन संघ (NKRC) हेतु समझौता ज्ञापन
सीएसआईआर-राष्ट्रीय विज्ञान संचार एवं नीति अनुसंधान संस्थान (CSIR-National Institute of Science Communication and Policy Research–CSIR-NIScPR) तथा पेटेंट, डिज़ाइन एवं व्यापार चिह्न महानियंत्रक का कार्यालय (Controller General of Patents, Designs and Trade Marks–CGPDTM) ने राष्ट्रीय ज्ञान संसाधन संघ (National Knowledge Resource Consortium–NKRC) के माध्यम से वैश्विक वैज्ञानिक एवं बौद्धिक संपदा (Intellectual Property–IP) संसाधनों तक पहुँच सुदृढ़ करने के लिए समझौता ज्ञापन (Memorandum of Understanding–MoU) पर हस्ताक्षर किए।
परीक्षा हेतु प्रमुख तथ्य:
- समझौता ज्ञापन (MoU) सीएसआईआर-राष्ट्रीय विज्ञान संचार एवं नीति अनुसंधान संस्थान (CSIR-NIScPR) तथा पेटेंट, डिज़ाइन एवं व्यापार चिह्न महानियंत्रक (CGPDTM) के बीच हस्ताक्षरित हुआ। सीजीपीडीटीएम (CGPDTM), उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (Department for Promotion of Industry and Internal Trade–DPIIT), वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय (Ministry of Commerce & Industry) के अंतर्गत कार्य करता है।
- राष्ट्रीय ज्ञान संसाधन संघ (National Knowledge Resource Consortium–NKRC) वैश्विक वैज्ञानिक पत्रिकाओं (Scientific Journals), पेटेंट डेटाबेस (Patent Databases), ग्रंथसूची डेटाबेस (Bibliographic Databases), मानकों (Standards) तथा अनुसंधान उपकरणों (Research Tools) तक पहुँच उपलब्ध कराता है, जिससे अनुसंधान (Research), नवाचार (Innovation) तथा साक्ष्य-आधारित पेटेंट परीक्षण (Evidence-based Patent Examination) को बढ़ावा मिलता है।
- राष्ट्रीय ज्ञान संसाधन संघ (NKRC) वर्तमान में अपनी रजत जयंती (Silver Jubilee – 25th Year) मना रहा है तथा इसके 82 सदस्य संस्थान (Member Institutions) हैं, जिनमें वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (Council of Scientific and Industrial Research–CSIR), विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (Department of Science & Technology–DST) तथा पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (Ministry of Earth Sciences–MoES) के संस्थान शामिल हैं।
- यह सहयोग बौद्धिक संपदा प्रशासन (Intellectual Property Administration), पेटेंट परीक्षण (Patent Examination), विज्ञान संचार (Science Communication), ज्ञान प्रबंधन (Knowledge Management) तथा नवाचार समर्थन (Innovation Support) को सुदृढ़ करेगा, साथ ही वैश्विक ज्ञान संसाधनों तक लागत-प्रभावी (Cost-effective) पहुँच सुनिश्चित करेगा।
3. एमवाई भारत (MY Bharat) ने ‘युवा यकृत मित्र (Yuva Yakrit Mitra–Y2M)’ कार्यक्रम प्रारंभ किया
मेरा युवा भारत (Mera Yuva Bharat–MY Bharat) ने इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बाइलियरी साइंसेज़ (Institute of Liver and Biliary Sciences–ILBS) के सहयोग से “जागरूक जिगर: नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत” वेबिनार आयोजित किया तथा युवा यकृत मित्र (Yuva Yakrit Mitra–Y2M) कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
परीक्षा हेतु प्रमुख तथ्य:
- यह वेबिनार युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय (Ministry of Youth Affairs & Sports) के अंतर्गत मेरा युवा भारत (MY Bharat) द्वारा इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बाइलियरी साइंसेज़ (ILBS) के सहयोग से आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य नशा-मुक्त (Drug-Free) एवं स्वस्थ भारत (Healthy India) को बढ़ावा देना है।
- केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मंडाविया (Dr. Mansukh Mandaviya) ने एमवाई भारत (MY Bharat) को युवाओं के विकास हेतु भारत का एकल-खिड़की मंच (Single-window Platform) बताया तथा जानकारी दी कि प्रतिदिन 1.5–2.5 लाख युवा इस मंच का उपयोग करते हैं।
- युवा यकृत मित्र (Yuva Yakrit Mitra–Y2M) कार्यक्रम, एमवाई भारत (MY Bharat) एवं आईएलबीएस (ILBS) द्वारा संयुक्त रूप से प्रारंभ किया गया है। इसके अंतर्गत यकृत स्वास्थ्य जागरूकता (Liver Health Awareness), निवारक स्वास्थ्य देखभाल (Preventive Healthcare), अंगदान (Organ Donation), सामुदायिक संपर्क (Community Outreach) तथा स्वास्थ्य संचार (Health Communication) में अनुभवात्मक अधिगम (Experiential Learning) प्रदान किया जाएगा।
- यह पहल विकसित भारत @2047 (Viksit Bharat @2047) के दृष्टिकोण (Vision) को साकार करने के लिए युवा स्वास्थ्य चैंपियन (Yuva Health Champions) तैयार करने तथा “नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत (Nasha Mukt Yuva for Viksit Bharat)” अभियान में युवाओं की सक्रिय भागीदारी को प्रोत्साहित करती है।
4. दिल्ली-एनसीआर हेतु परिवर्तन (PARIVARTAN) योजना के दिशा-निर्देशों को मंजूरी
आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय (Ministry of Housing and Urban Affairs–MoHUA) ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (National Capital Region–NCR) में पुराने प्रदूषणकारी ट्रकों एवं बसों के प्रतिस्थापन के लिए परिवर्तन योजना (PARIVARTAN Scheme) के परिचालन दिशा-निर्देश (Operational Guidelines) को स्वीकृति प्रदान की है।
परीक्षा हेतु प्रमुख तथ्य:
- परिवर्तन (PARIVARTAN – Programme for Accelerated Renewal and Incentivization of Vehicle Assets for Reducing Transport Air Pollution and Network Emissions) योजना का उद्देश्य दिल्ली-एनसीआर (Delhi-NCR) में पुराने ट्रकों एवं बसों को भारत स्टेज-VI (Bharat Stage–BS-VI) मानक-अनुरूप अथवा विद्युत वाहनों (Electric Vehicles–EVs) से प्रतिस्थापित करना है।
- इस योजना की कुल लागत ₹9,585 करोड़ है, जिसमें ₹5,041 करोड़ केंद्र सरकार (Central Government) द्वारा प्रदान किए जाएंगे। इस योजना को केंद्रीय मंत्रिमंडल (Union Cabinet) ने 3 जून 2026 को स्वीकृति दी थी।
- सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (Ministry of Road Transport and Highways–MoRTH) इस योजना का कार्यान्वयन (Implementation) करेगा तथा इसका वित्तपोषण राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र योजना बोर्ड (National Capital Region Planning Board–NCRPB) के माध्यम से किया जाएगा।
- योजना के अंतर्गत मोटर वाहन कर (Motor Vehicle Tax) में रियायत, पंजीकरण शुल्क (Registration Fee) में छूट, वाहन ऋण (Vehicle Loan) पर 5% ब्याज अनुदान (Interest Subvention), न्यूनतम 8% मूल उपकरण निर्माता (Original Equipment Manufacturer–OEM) छूट, ईंधन वाउचर (Fuel Voucher) सहायता तथा विद्युत प्रतिस्थापन वाहनों (Electric Replacement Vehicles) के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी।
5. भारतीय मानक समय (Indian Standard Time–IST) हेतु ‘व्हाइट रैबिट टेक्नोलॉजी (White Rabbit Technology)’ आधारित नेटवर्क का प्रदर्शन
केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी (Pralhad Joshi) ने ‘वन नेशन, वन टाइम (One Nation, One Time)’ पहल के अंतर्गत जक्कूर, बेंगलुरु में व्हाइट रैबिट टेक्नोलॉजी (White Rabbit Technology) आधारित भारतीय मानक समय (Indian Standard Time–IST) वितरण प्रदर्शन नेटवर्क (Distribution Demonstration Network) का उद्घाटन किया।
परीक्षा हेतु प्रमुख तथ्य:
- व्हाइट रैबिट टेक्नोलॉजी (White Rabbit Technology) आधारित भारतीय मानक समय (IST) वितरण प्रदर्शन नेटवर्क का उद्देश्य ‘वन नेशन, वन टाइम (One Nation, One Time)’ के दृष्टिकोण के अनुरूप पूरे देश में एक समान (Uniform), अत्यधिक सटीक (Highly Precise) एवं सुरक्षित (Secure) भारतीय मानक समय उपलब्ध कराना है।
- इस परियोजना का कार्यान्वयन उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय (Ministry of Consumer Affairs, Food and Public Distribution) के वैधानिक माप विज्ञान प्रभाग (Legal Metrology Division) द्वारा राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला (National Physical Laboratory–NPL), भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (Indian Space Research Organisation–ISRO), भारत संचार निगम लिमिटेड (Bharat Sanchar Nigam Limited–BSNL) तथा भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (Securities and Exchange Board of India–SEBI) के सहयोग से किया जा रहा है।
- यह स्वदेशी प्रणाली (Indigenous System) ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (Global Positioning System–GPS) जैसे विदेशी समय स्रोतों पर निर्भरता कम करेगी, जिससे साइबर सुरक्षा (Cybersecurity) सुदृढ़ होगी तथा बैंकिंग (Banking), शेयर बाजार (Stock Exchanges), दूरसंचार (Telecommunications), विद्युत ग्रिड (Power Grids) एवं रक्षा-संबंधी डिजिटल अवसंरचना (Defence-related Digital Infrastructure) की विश्वसनीयता बढ़ेगी।
- यह प्रणाली वैश्विक समन्वित सार्वभौमिक समय (Coordinated Universal Time–UTC) प्रोटोकॉल का अनुपालन करती है तथा भारत की डिजिटल संप्रभुता (Digital Sovereignty) एवं सुरक्षित समय समकालिकरण अवसंरचना (Secure Time Synchronization Infrastructure) को सुदृढ़ करती है।
6. भारत की ब्रिक्स (BRICS) अध्यक्षता में राष्ट्रीय मानक निकायों (NSBs) की बैठक बेंगलुरु में आयोजित
भारत ने अपनी ब्रिक्स (BRICS) अध्यक्षता (Chairship) के अंतर्गत भारतीय मानक ब्यूरो (Bureau of Indian Standards–BIS) द्वारा आयोजित राष्ट्रीय मानक निकायों (National Standards Bodies–NSBs) के प्रमुखों की दो-दिवसीय बैठक का बेंगलुरु में उद्घाटन किया।
परीक्षा हेतु प्रमुख तथ्य:
- यह बैठक भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता (BRICS Chairship) की थीम “बिल्डिंग फॉर रेज़िलिएंस, इनोवेशन, कोऑपरेशन एंड सस्टेनेबिलिटी (Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability)” के अंतर्गत आयोजित की जा रही है।
- बैठक में मानकीकरण (Standardization) के क्षेत्र में सहयोग हेतु समझौता ज्ञापन (Memorandum of Understanding–MoU) के मसौदे पर सर्वसम्मति (Consensus) बनी। इसका उद्देश्य गुणवत्ता अवसंरचना (Quality Infrastructure) को सुदृढ़ करना, उपभोक्ता संरक्षण (Consumer Protection) को बढ़ावा देना, व्यापार में तकनीकी बाधाओं (Technical Barriers to Trade) को कम करना तथा अंतरराष्ट्रीय मानकीकरण संगठन (International Organization for Standardization–ISO) एवं अंतरराष्ट्रीय विद्युत-तकनीकी आयोग (International Electrotechnical Commission–IEC) के साथ सहयोग बढ़ाना है।
- ब्रिक्स (BRICS) विश्व की लगभग 49.5% जनसंख्या, 40% वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (Global GDP) तथा 26% वैश्विक व्यापार (Global Trade) का प्रतिनिधित्व करता है। इसलिए सदस्य देशों के बीच मानकों का सामंजस्य (Harmonization of Standards) वैश्विक आर्थिक सहयोग के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
- बैठक के अंतर्गत कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence–AI) मानकीकरण (Standardization) पर एक विषयगत कार्यशाला (Thematic Workshop) भी आयोजित की जा रही है, जिसमें भारतीय मानक ब्यूरो (BIS–भारत), गोस्ट आर (GOST R–रूस), एसएसी (SAC–चीन), एबीएनटी (ABNT–ब्राज़ील) तथा एमओआईएटी-एसएएस (MoIAT-SAS–संयुक्त अरब अमीरात) सहित विभिन्न देशों के मानक निकाय भाग ले रहे हैं।
7. एनएचएआई (NHAI) ने एनएचआईटी (NHIT) के माध्यम से राष्ट्रीय राजमार्ग परिसंपत्तियों के संचालन एवं अनुरक्षण (O&M) को सुदृढ़ किया
राष्ट्रीय राजमार्ग अवसंरचना ट्रस्ट (National Highways Infra Trust–NHIT) ने राष्ट्रीय राजमार्ग परिसंपत्तियों के संचालन एवं अनुरक्षण (Operations and Maintenance–O&M) को अधिक पेशेवर एवं प्रौद्योगिकी-संचालित बनाने के लिए सामान्य प्रबंधन परामर्शदाताओं (General Management Consultants–GMCs) की नियुक्ति की है।
परीक्षा हेतु प्रमुख तथ्य:
- राष्ट्रीय राजमार्ग अवसंरचना ट्रस्ट (National Highways Infra Trust–NHIT), भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (National Highways Authority of India–NHAI) द्वारा प्रायोजित अवसंरचना निवेश ट्रस्ट (Infrastructure Investment Trust–InvIT) है। इसका भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (Securities and Exchange Board of India–SEBI) में अक्टूबर 2020 में पंजीकरण हुआ था तथा वर्तमान में यह 2,653 किमी राष्ट्रीय राजमार्ग परिसंपत्तियों का प्रबंधन कर रहा है।
- प्रथम चरण (First Phase) में सामान्य प्रबंधन परामर्शदाता (General Management Consultants–GMCs) 908 किमी राष्ट्रीय राजमार्ग परिसंपत्तियों के संचालन एवं अनुरक्षण (O&M) का प्रबंधन करेंगे। इसके लिए प्रौद्योगिकी-संचालित निरीक्षण (Technology-driven Inspections) तथा वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं (Global Best Practices) को अपनाया जाएगा।
- नेशनल हाईवेज़ इनविट प्रोजेक्ट मैनेजर्स प्राइवेट लिमिटेड (National Highways InvIT Project Managers Private Limited–NHIPMPL), जो एनएचएआई (NHAI) की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी (Wholly Owned Subsidiary) है, इस परियोजना में परियोजना प्रबंधक (Project Manager) की भूमिका निभाएगी तथा सेबी इनविट विनियम (SEBI InvIT Regulations) के अनुपालन को सुनिश्चित करेगी।
- इस पहल का उद्देश्य परिसंपत्ति प्रदर्शन (Asset Performance), सड़क सुरक्षा (Road Safety), यातायात एवं टोल प्रबंधन (Traffic and Toll Management) में सुधार करना, सुशासन (Governance) को सुदृढ़ करना, निवेशक विश्वास (Investor Confidence) बढ़ाना तथा राष्ट्रीय राजमार्ग अवसंरचना में घरेलू एवं वैश्विक निवेश (Domestic and Global Investment) को आकर्षित करना है।
8. भारत की पहली हाइड्रोजन ईंधन सेल ट्रेन (Hydrogen Fuel Cell Train) शुरू
भारतीय रेल (Indian Railways) ने भारत की पहली हाइड्रोजन ईंधन सेल ट्रेन (Hydrogen Fuel Cell Train) शुरू की है, जो स्वच्छ एवं सतत (Sustainable) रेल परिवहन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
परीक्षा हेतु प्रमुख तथ्य:
- मार्ग (Route): प्रारंभिक संचालन जींद–सोनीपत (Jind–Sonipat), हरियाणा खंड पर उत्तरी रेलवे (Northern Railway) के अंतर्गत; 10 कोच (Coaches) तथा लगभग 2,600 यात्रियों की क्षमता।
- प्रौद्योगिकी (Technology): प्रोटॉन एक्सचेंज मेम्ब्रेन (Proton Exchange Membrane–PEM) ईंधन सेल (Fuel Cell) तकनीक का उपयोग, जिसमें हाइड्रोजन (Hydrogen) एवं ऑक्सीजन (Oxygen) की रासायनिक अभिक्रिया से ट्रेन के भीतर ही विद्युत (Electricity) उत्पन्न होती है तथा उप-उत्पाद (By-product) के रूप में केवल जलवाष्प (Water Vapour) निकलती है।
- अवसंरचना एवं सुरक्षा (Infrastructure & Safety): जींद (Jind) में भारतीय रेल की सबसे बड़ी हाइड्रोजन ईंधन-भराव (Hydrogen Refuelling) सुविधा स्थापित; पेट्रोलियम एवं विस्फोटक सुरक्षा संगठन (Petroleum and Explosives Safety Organisation–PESO) से अनुमोदित तथा टीयूवी सूड, जर्मनी (TÜV SÜD, Germany) द्वारा स्वतंत्र सुरक्षा मूल्यांकन; हाइड्रोजन रिसाव (Leak), ऊष्मा (Heat), आग की लपट (Flame) एवं धुएँ (Smoke) का पता लगाने वाली बहु-स्तरीय सुरक्षा प्रणाली।
- विकास (Developed by): भारतीय रेल (Indian Railways) के नेतृत्व में विकसित; अनुसंधान अभिकल्प एवं मानक संगठन (Research Designs and Standards Organisation–RDSO) ने तकनीकी विनिर्देश (Technical Specifications) तैयार किए, मेधा सर्वो ड्राइव्स (Medha Servo Drives) ने ट्रेन का एकीकरण (Integration) किया तथा इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (Integral Coach Factory–ICF) ने बाहरी डिजाइन विकसित किया; यह परियोजना राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन (National Green Hydrogen Mission) तथा भारत के नेट ज़ीरो (Net Zero) लक्ष्यों को सुदृढ़ करती है।
9. भारतीय नौसेना में आईएनएस मालवन (INS Malvan) का कमीशनिंग
भारतीय नौसेना (Indian Navy) 22 जुलाई 2026 को आईएनएस मालवन (INS Malvan), जो माहे-श्रेणी पनडुब्बी रोधी उथले जल युद्धपोत (Mahe-class Anti-Submarine Warfare Shallow Water Craft–ASW-SWC) का दूसरा पोत है, का कमीशनिंग (Commissioning) करेगी।
परीक्षा हेतु प्रमुख तथ्य:
- आईएनएस मालवन (INS Malvan) माहे-श्रेणी पनडुब्बी रोधी उथले जल युद्धपोत (Mahe-class Anti-Submarine Warfare Shallow Water Craft–ASW-SWC) का दूसरा पोत है, जिसका कमीशनिंग (Commissioning) 22 जुलाई 2026 को किया जाएगा।
- इसका निर्माण कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (Cochin Shipyard Limited–CSL), कोच्चि द्वारा किया गया है तथा इसमें 80% से अधिक स्वदेशी सामग्री (Indigenous Content) का उपयोग किया गया है, जो आत्मनिर्भर भारत (Aatmanirbhar Bharat) पहल को सुदृढ़ करता है।
- कमीशनिंग समारोह (Commissioning Ceremony) की अध्यक्षता एयर चीफ मार्शल ए. पी. सिंह (Air Chief Marshal A. P. Singh), वायु सेना प्रमुख (Chief of the Air Staff) करेंगे तथा इसमें वाइस एडमिरल संजय वात्स्यायन (Vice Admiral Sanjay Vatsayan), फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ, पश्चिमी नौसैनिक कमान (Flag Officer Commanding-in-Chief, Western Naval Command) उपस्थित रहेंगे।
- यह युद्धपोत पनडुब्बी रोधी युद्ध (Anti-Submarine Warfare–ASW) के लिए उथले जल (Shallow Waters) में संचालन हेतु डिज़ाइन किया गया है तथा भारतीय नौसेना की स्वदेशी नौसैनिक क्षमता (Indigenous Naval Capability) और तटीय सुरक्षा (Coastal Defence) को सुदृढ़ करेगा।
10. नशा मुक्त भारत अभियान (Nasha Mukt Bharat Abhiyaan) से 29.32 करोड़ से अधिक नागरिक जुड़े
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय (Ministry of Social Justice and Empowerment) ने बताया कि नशा मुक्त भारत अभियान (Nasha Mukt Bharat Abhiyaan–NMBA) के माध्यम से देशभर में 29.32 करोड़ से अधिक नागरिकों तक जन-जागरूकता एवं सामुदायिक सहभागिता पहुँच चुकी है।
परीक्षा हेतु प्रमुख तथ्य:
- नशा मुक्त भारत अभियान (Nasha Mukt Bharat Abhiyaan–NMBA) का शुभारंभ 15 अगस्त 2020 को राष्ट्रीय मादक पदार्थ मांग न्यूनीकरण कार्ययोजना (National Action Plan for Drug Demand Reduction–NAPDDR) के अंतर्गत सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय (Ministry of Social Justice and Empowerment) द्वारा किया गया।
- अभियान के माध्यम से 29.32 करोड़ नागरिकों तक पहुँच बनाई गई है, जिनमें 11.20 करोड़ युवा तथा 7.92 करोड़ महिलाएँ शामिल हैं। साथ ही, शैक्षणिक संस्थानों में 21 लाख से अधिक जागरूकता एवं संवेदनशीलता गतिविधियाँ (Awareness and Sensitisation Activities) आयोजित की गई हैं।
- राष्ट्रीय मादक पदार्थ मांग न्यूनीकरण कार्ययोजना (NAPDDR) के अंतर्गत 768 केंद्रों के माध्यम से 28.29 लाख से अधिक लाभार्थियों को उपचार (Treatment) एवं पुनर्वास (Rehabilitation) सेवाएँ प्रदान की गईं। उपचार प्राप्त करने वालों की संख्या 2.08 लाख (2020) से बढ़कर 8.20 लाख (2025) हो गई है।
- मादक पदार्थ नशामुक्ति हेल्पलाइन (Drug De-addiction Helpline) – 14446 पर 4.60 लाख से अधिक कॉल प्राप्त हुई हैं। साथ ही एनएमबीए ऐप 2.0 (NMBA App 2.0), नशा मुक्त भारत प्रतिज्ञा (NMBA Pledge) तथा नशा मुक्ति मित्र (Nasha Mukti Mitra) पहल के माध्यम से नागरिकों की सक्रिय भागीदारी को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे नशा मुक्त भारत (Drug-Free India) के लक्ष्य को साकार किया जा सके।
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